जीरो टॉलरेंस का दावा ताक पर, MMG में फाइल के भीतर रिश्वत लेते दिखा कर्मचारी, तो जिला संयुक्त अस्पताल में डॉक्टर साहब मांगते नजर आए मरीज से पैसे; हड़कंप के बाद सीएमएस बोले, ‘मेरे संज्ञान में नहीं था मामला’
एक तरफ प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत पारदर्शी शासन का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ गाजियाबाद का स्वास्थ्य विभाग सरकार की इस मंशा पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों के मुफ्त इलाज और सुविधाओं के लंबे-चौड़े वादों के बीच गाजियाबाद से सामने आए दो सनसनीखेज मामलों ने पूरे महकमे की कलई खोलकर रख दी है।
गाजियाबाद के दो प्रमुख अस्पतालों-एमएमजी अस्पताल और जिला संयुक्त अस्पताल में जारी इस दलाली और अवैध वसूली का पर्दाफाश एक गुप्त स्टिंग ऑपरेशन के जरिए हुआ है। इसके बाद से ही स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

एमएमजी अस्पताल, फाइल के पन्नों में दबते नोट और पर्ची का खेल
एमएमजी अस्पताल से सामने आए पहले मामले में गुप्त कैमरे में कैद तस्वीरें सीधे तौर पर स्वास्थ्य कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती हैं। वीडियो में अस्पताल के एक कमरे में एक असहाय महिला और एक युवक स्वास्थ्यकर्मी के सामने खड़े नजर आते हैं।
चर्चा के दौरान कर्मचारी मेज पर रखी एक सरकारी फाइल खोलता है। तीमारदार युवक चुपके से उस फाइल के भीतर तय की गई रकम रखता है। इसके तुरंत बाद कर्मचारी बिना किसी झिझक के फाइल में रखी रकम को कन्फर्म करता है। वीडियो में युवक को यह कहते सुना जा सकता है कि जितनी रकम मांगी गई थी, उतनी दे दी गई है। इस पर कर्मचारी संतुष्टि जताते हुए कहता है, “ठीक है, अब आगे एक और पर्ची कटेगी, उसमें अलग से पैसा लगेगा।”
अब सवाल यह उठता है कि जब सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं मुफ्त या तय सरकारी शुल्क पर उपलब्ध हैं, तो इस तरह की फाइल वसूली और अतिरिक्त पर्ची के नाम पर किस बात का पैसा लिया जा रहा था?

जिला संयुक्त अस्पताल, सर्जन की मेज पर ऑपरेशन का रेट कार्ड!
एमएमजी अस्पताल के इस खुलासे के साथ ही गाजियाबाद जिला संयुक्त अस्पताल से भी एक और गंभीर मामला सामने आया है। हमारी टीम के हाथ लगे एक अन्य वीडियो में अस्पताल के सर्जन डॉ. महेंद्र कुमार कथित तौर पर एक मरीज से ऑपरेशन के एवज में सीधे पैसे मांगते दिखाई दे रहे हैं। दूर-दराज से आने वाले गरीब मरीज, जो निजी अस्पतालों का भारी-भरकम खर्च उठाने में असमर्थ होकर सरकारी अस्पताल की चौखट पर आते हैं, वहां उन्हें इलाज के नाम पर इस तरह की अवैध मांग का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन का रवैया, ‘संज्ञान में नहीं था मामला’
इस पूरे मामले और वायरल वीडियो के संबंध में जब जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. राकेश कुमार से सवाल किया गया, तो उन्होंने पारंपरिक प्रशासनिक ढाल का सहारा लिया।
‘यह पूरा मामला अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं था। हालांकि, यदि इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत मिलती है या वीडियो की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी’ – डॉ. राकेश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS)
उठे गंभीर सवाल, आखिर कब तक ढीली रहेगी नकेल?
अस्पताल प्रशासन भले ही अनभिज्ञता का बहाना बनाए, लेकिन यह घटना कई कड़े सवाल छोड़ती है
प्रशासनिक अनदेखी: यदि अस्पतालों में पहले भी इस प्रकार की शिकायतें आती रही हैं, तो आंतरिक निगरानी तंत्र पूरी तरह नाकाम क्यों साबित हो रहा है?
सरकार की छवि पर धब्बा: जब मुख्यमंत्री स्तर से सख्त निर्देश जारी हैं, तब सरकारी तंत्र में बैठे ऐसे कौन से तत्व हैं जो बेखौफ होकर अपनी जेबें भरने और सरकार की साख खराब करने में लगे हैं?
कार्रवाई का इंतजार: क्या महकमा केवल कागजी जांच और नोटिस जारी करने तक सीमित रहेगा या दोषियों पर कड़ी अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी?
फिलहाल, इस खुलासे के बाद पूरे गाजियाबाद जिले की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि गरीबों के हक पर डाका डालने वालों पर गाज कब गिरती है।
