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धरती से दोस्ती का संदेश: सरदार पटेल सेवा संस्थान ने चलाया पौधारोपण अभियान, पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प

गाजियाबादः प्रकृति का संरक्षण केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से रविवार, 2 अगस्त 2026 को सरदार पटेल सेवा संस्थान द्वारा मोहन नगर स्थित संस्थान परिसर एवं पटेल उद्यान में व्यापक पौधारोपण अभियान चलाया गया। इस अभियान में नगर निगम गाजियाबाद ने भी सक्रिय सहयोग किया।
स्थान के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने जामुन, अर्जुन, अमलतास, गुलमोहर, गुड़हल सहित विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित किए और उनके संरक्षण एवं देखभाल का संकल्प लिया। यह पौधारोपण न केवल सरदार पटेल वाटिका को हराभरा बनाएगा, बल्कि आने वाले वर्षों में मोहन नगर चौराहे की सुंदरता और पर्यावरणीय संतुलन को भी नई पहचान देगा।

इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष आर.पी. चौधरी ने कहा कि वर्ष 1992 में स्थापित सरदार पटेल सेवा संस्थान हमेशा समाजहित और राष्ट्रहित के कार्यों में अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि एक पौधा केवल पेड़ नहीं बनता, बल्कि वह भविष्य की शुद्ध हवा, स्वच्छ पर्यावरण और सुरक्षित जीवन का आधार बनता है। उन्होंने सभी नागरिकों से इस मानसून में अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की अपील की।
कार्यकारी अध्यक्ष जगदीश प्रसाद वर्मा ने कहा कि वे वर्ष 1992 से संस्था से जुड़े हैं और संस्था निरंतर सामाजिक सरोकारों के कार्यों में सक्रिय है। उन्होंने कहा कि आज पर्यावरण का असंतुलन केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के सामने गंभीर चुनौती बन चुका है। इस संकट से निपटने का सबसे सरल और प्रभावी उपाय अधिक से अधिक वृक्षारोपण है।
संस्था के सचिव राधेश्याम गंगवार ने कहा कि स्वच्छ पर्यावरण ही स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने लोगों से पौधे लगाने के साथ-साथ उनके संरक्षण का भी आग्रह किया।


उपाध्यक्ष संतोष उमराव ने फ्रेंडशिप डे का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि हमें किसी से सच्ची दोस्ती करनी है तो वह हमारी धरती और प्रकृति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि “धरा का सबसे सुंदर आभूषण वृक्ष हैं।” पेड़ लगाकर हम धरती मां का श्रृंगार करते हैं और मानव जीवन को सुरक्षित बनाते हैं।
उपाध्यक्ष राज कुमार वर्मा ने कहा कि लोग अक्सर कहते हैं कि “जल ही जीवन है”, लेकिन वास्तव में “वृक्ष ही जीवन हैं।” जब तक वृक्ष हैं, तब तक ऑक्सीजन है, जीवन है और भविष्य सुरक्षित है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए।
नगर निगम गाजियाबाद के हेड माली चंद्र पाल ने बताया कि नगर निगम ने इस वर्ष 11 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। उन्होंने सरदार पटेल सेवा संस्थान के साथ मिलकर पौधारोपण करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान राजेंद्र वर्मा, राजा रवि प्रियदर्शी, त्रिलोक उमराव सहित संस्था के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।
एक पौधा लगाना केवल हरियाली बढ़ाना नहीं, बल्कि जीवन को बचाने का संकल्प है। आज जब जलवायु परिवर्तन, बढ़ता प्रदूषण और घटते वन मानव अस्तित्व के लिए चुनौती बन चुके हैं, तब प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह कम से कम एक पौधा लगाए और उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित करे। यही प्रयास आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, संतुलित पर्यावरण और सुरक्षित भविष्य प्रदान करेगा।

नामी स्कूलों और कॉलेजों में खुलेआम उड़ रहीं परिवहन नियमों की धज्जियां, फिटनेस, परमिट और ‘कलर कोड’ पर उठ रहे गंभीर सवाल

गाजियाबाद में बच्चों की सुरक्षा से हो रहा खिलवाड़, ‘नोएडा-हरियाणा’ के वाहनों पर गाजियाबाद के बच्चों का भविष्य लग रहा दांव पर?

विशेष संवाददाता: प्रमोद कौशिक

गाजियाबाद: लगता है गाजियाबाद का परिवहन विभाग (RTO) किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? शहर के नामचीन और नामी-गिरामी शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा को दरकिनार कर बेधड़क दौड़ रहीं अनधिकृत बसों और टेंपो ट्रैवलर को देखकर तो ऐसा ही कहा जा सकता है। यहाँ के प्रमुख स्कूलों और महाविद्यालयों में चल रहे परिवहन वाहनों को लेकर अब एक नया और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सीधे आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी) की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूछा जा रहा है कि आखिर दूसरे राज्यों और अन्य जिलों (हरियाणा, दिल्ली, नोएडा, बागपत) में पंजीकृत वाहन बिना वैध स्कूल परमिट के गाजियाबाद की सड़कों पर नौनिहालों को कैसे ढो रहे हैं?
कटघरे में नामी संस्थान: सूची देखकर हैरान रह जाएंगे आप
प्राप्त जानकारी और शिकायती पत्र के अनुसार, शहर के सबसे प्रतिष्ठित माने जाने वाले संस्थानों के परिवहन संचालन पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। इनमें DPSG, मेरठ रोड, दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS), HRIT कैंपस, के.डी.पी. स्कूल, कवि नगर,
डी.पी.एस. पब्लिक स्कूल, राजेंद्र नगर (साहिबाबाद),
दीवान स्कूल, मोहन नगर,
एमिटी इंटरनेशनल स्कूल, सेक्टर-6, वसुंधरा, सुंदरदीप विश्वविद्यालय, डासना-मसूरी और डीपीएस, सिद्धार्थ विहार जैसे आधा दर्जन से ज्यादा बड़े नाम शामिल हैं। खास तौर पर डीपीएस सिद्धार्थ विहार में चलने वाले कई वाहनों के नंबर (जैसे- HR55 AE 3902, HR55 AD7431, HR38 V2621, DL1ZD 9517, UP16 PT4046 आदि) सार्वजनिक कर सीधे आरटीओ से पूछा गया है कि क्या इन वाहनों के पास गाजियाबाद में स्कूल बस के रूप में संचालन का वैध परमिट है?
उड़ रही नियमों की धज्जियां: आरटीओ से पूछे जा रहे 5 बड़े सवाल
‘ऑल इंडिया परमिट’ पर स्कूल बसें क्यों?

कई वाहन केवल ‘ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट’ या सामान्य व्यवसायिक परमिट पर चल रहे हैं, जबकि स्कूल बस संचालन के लिए विशेष ट्रांसपोर्ट परमिट और सुरक्षा नियम अनिवार्य होते हैं। आरटीओ इस अनदेखी पर खामोश क्यों है?
कहां गायब हुआ ‘स्कूल बस कलर कोड’?
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के अनुसार स्कूल बसों का रंग पीला और उस पर निर्धारित सुरक्षा मानक अंकित होने चाहिएं। लेकिन शहर में टेंपो ट्रैवलर और बिना निर्धारित रंग-रूप वाली गाड़ियों में ठूंस-ठूंस कर बच्चों को लाया जा रहा है।
कागजों में फिटनेस या सड़कों पर जानलेवा गाड़ियां?
आशंका जताई जा रही है कि दर्जनों वाहनों के पास वैध फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा (Insurance) और प्रदूषण प्रमाण पत्र तक नहीं हैं। अगर कोई दुर्घटना होती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी?
दूसरे राज्यों का रजिस्ट्रेशन, गाजियाबाद में कमर्शियल खेल?
हरियाणा (HR) और दिल्ली (DL) नंबर की गाड़ियां टैक्स बचाने के चक्कर में गाजियाबाद के स्कूलों से अनुबंध कर दौड़ रही हैं। इससे उत्तर प्रदेश सरकार को राजस्व का चूना तो लग ही रहा है, बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में है।
स्कूल प्रबंधन और ठेकेदारों की ‘साठगांठ’?


क्या निजी परिवहन संचालकों और स्कूल प्रबंधनों के बीच किसी अंदरूनी मिलीभगत के चलते आरटीओ का प्रवर्तन दल (Enforcement Wing) इन गाड़ियों पर हाथ डालने से डरता है?
जनता का गुस्सा:’बच्चों की जान से समझौता बर्दाश्त नहीं’
स्थानीय अभिभावकों और जागरूक नागरिकों का कहना है कि हर साल भारी-भरकम फीस वसूलने वाले बड़े स्कूल बसों के नाम पर थर्ड-पार्टी ठेकेदारों को काम सौंपकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। जब कोई चेकिंग अभियान चलता है, तो कुछ दिन गाड़ियां खड़ी कर दी जाती हैं और फिर वही खेल शुरू हो जाता है।
‘क्या परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम केवल आम गाड़ियों के चालान काटने के लिए है? नामी स्कूलों की अवैध बसों और दूसरे राज्यों की गाड़ियों पर आरटीओ द्वारा सीज की कार्रवाई कब दिखेगी?’— एक आक्रोशित अभिभावक
अब आरटीओ गाजियाबाद पर टिकीं निगाहें
16 जुलाई को आधिकारिक रूप से आरटीओ कार्यालय गाजियाबाद को भेजे गए शिकायत पत्र के बाद अब गेंद परिवहन विभाग के पाले में है। मांग की गई है कि, इन सभी 8 प्रमुख शिक्षण संस्थानों के बेड़े में शामिल एक-एक वाहन की गहन भौतिक व कागजी जांच (Special Drive) की जाए। बिना स्कूल परमिट, बिना फिटनेस या दूसरे राज्यों की अवैध रूप से चल रही गाड़ियों को तत्काल प्रभाव से सीज (Seize) किया जाए। दोषियों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) की सख्त धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हो।
भारत फोकस टीवी आरटीओ गाजियाबाद से सीधे सवाल पूछता है, क्या आप किसी हादसे का इंतजार करेंगे या इन स्कूलों की गाड़ियों पर चलाएंगे चाबुक?

सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार का खेल है बदस्तूर जारी गाजियाबाद में अनाधिकृत लोग विगाग के कर्मचारियों की लोग-इन आईडी से कर रहे हैं जमकर खेल


गाजियाबाद। भ्रष्टाचार रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की तमाम कोशिशों के बाद भी गाजियाबाद परिवहन विभाग सुधरने को तैयार नजर नहीं आ रहा। आलम यह है कि यहाँ कोई भी कार्य बिना दलालों के करवाना संभव नहीं है। प्रत्येक कार्य के लिए यहाँ रेट तय हैं और यदि आप सीधे रास्ते से जाकर यहाँ कोई कार्य करवाने की सोच भी रहे हैं तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी। विभाग के कर्मचारी आपकी यहाँ आने पर ऐसी चकरघिन्नी बनाएंगे कि मजबूरन आपको दलाल की शरण लेनी ही पड़ेगी।


गाजियाबाद परिवहन विभाग में रूम नंबर-18 ने तो भ्रष्टाचार की मानों सारी हदें ही पार कर ली हों। अगर आप किसी कमर्शियल वाहन के स्वामी हैं और आपको इसका रेजिस्ट्रेशन करवाना है तो आपका वास्ता रूम नंबर-18 से अवश्य पड़ेगा। यहाँ सीधे आने पर आपको यहाँ के बाबू धर्मेंद्र कुमार शर्मा और राजेंद्र सोनकिया का रटा-रटाया जवाब मिलेगा कि पहले आप एआरटीओ साहब से मार्किंग करवा कर लाइए। एआरटीओ के नाम से ही कुछ लोग तो निराश होकर बीच का रास्ता निकालने पर मजबूर हो जाते हैं। यदि कुछ लोग हिम्मत कर एआरटीओ तक जाने का साहस कर भी लेते हैं तो कई दिनों तक मारा-मारा फिरने के बाद उन्हें भी आखिरकार बीच का रास्ता ही अपनाने पर मजबूर होना पड़ता है। इसके बाद शुरु होता है असल खेल।


रेजिस्ट्रेशन करवाने आए व्यक्ति को सरफराज, नरेंद्र और ओपी नामक लोगों के हवाले कर दिया जाता। हालात यह हैं कि इन सभी लोगों का रूम नंबर-18 में एक तरह से पूरा सिक्का चलता है। यह सभी लोग कौन हैं और परिवहन विभाग में किस हैसियत से जमे हैं इसका पता यहाँ के दो बाबूओं धर्मेंद्र कुमार शर्मा और राजेंद्र सोनकिया के अलावा किसी को नहीं है। परंतु सरफराज, नरेंद्र और ओपी का रुतबा इतना है कि यह सभी लोग बे रोकटोक तरीके से परिवहन विभाग के बाबूओं, धर्मेंद्र कुमार शर्मा और राजेंद्र सोनकिया, की आईडी से विभाग की साइट पर सीधे लोग-इन तक करने का माद्दा रखते हैं।


इन सभी लोगों का रसूख देखकर परिवहन विभाग में ही लोग दबी जुबान से कानाफूसी भी करने लगे हैं। लोग सवाल उठाने लगे हैं कि आखिरकार इन लोगों को किसने इतने अधिकार दिए हैं कि यह सभी लोग बेखोफ होकर रूम नंबर-18 की लोग-इन आईडी तक इस्तेमाल कर रहे हैं? इन लोगों की शरण में पहुँचने वाले लोगों को काम के हिसाब से दाम तो खर्चने पड़ते हैं परंतु इसके बाद उनका रुका हुआ काम बिना किसी हिलाहवाली के महज 1 से 2 दिन में पूरा होना तय है।

गाजियाबाद के सरकारी अस्पतालों में ‘इलाज’ के नाम पर ‘वसूली’ का खेल, स्टिंग ऑपरेशन में बेनकाब हुआ स्वास्थ्य विभाग

जीरो टॉलरेंस का दावा ताक पर, MMG में फाइल के भीतर रिश्वत लेते दिखा कर्मचारी, तो जिला संयुक्त अस्पताल में डॉक्टर साहब मांगते नजर आए मरीज से पैसे; हड़कंप के बाद सीएमएस बोले, ‘मेरे संज्ञान में नहीं था मामला’

एक तरफ प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के तहत पारदर्शी शासन का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ गाजियाबाद का स्वास्थ्य विभाग सरकार की इस मंशा पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों के मुफ्त इलाज और सुविधाओं के लंबे-चौड़े वादों के बीच गाजियाबाद से सामने आए दो सनसनीखेज मामलों ने पूरे महकमे की कलई खोलकर रख दी है।

गाजियाबाद के दो प्रमुख अस्पतालों-एमएमजी अस्पताल और जिला संयुक्त अस्पताल में जारी इस दलाली और अवैध वसूली का पर्दाफाश एक गुप्त स्टिंग ऑपरेशन के जरिए हुआ है। इसके बाद से ही स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

एमएमजी अस्पताल, फाइल के पन्नों में दबते नोट और पर्ची का खेल

एमएमजी अस्पताल से सामने आए पहले मामले में गुप्त कैमरे में कैद तस्वीरें सीधे तौर पर स्वास्थ्य कर्मचारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती हैं। वीडियो में अस्पताल के एक कमरे में एक असहाय महिला और एक युवक स्वास्थ्यकर्मी के सामने खड़े नजर आते हैं।

चर्चा के दौरान कर्मचारी मेज पर रखी एक सरकारी फाइल खोलता है। तीमारदार युवक चुपके से उस फाइल के भीतर तय की गई रकम रखता है। इसके तुरंत बाद कर्मचारी बिना किसी झिझक के फाइल में रखी रकम को कन्फर्म करता है। वीडियो में युवक को यह कहते सुना जा सकता है कि जितनी रकम मांगी गई थी, उतनी दे दी गई है। इस पर कर्मचारी संतुष्टि जताते हुए कहता है, “ठीक है, अब आगे एक और पर्ची कटेगी, उसमें अलग से पैसा लगेगा।”

अब सवाल यह उठता है कि जब सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं मुफ्त या तय सरकारी शुल्क पर उपलब्ध हैं, तो इस तरह की फाइल वसूली और अतिरिक्त पर्ची के नाम पर किस बात का पैसा लिया जा रहा था?

जिला संयुक्त अस्पताल, सर्जन की मेज पर ऑपरेशन का रेट कार्ड!

एमएमजी अस्पताल के इस खुलासे के साथ ही गाजियाबाद जिला संयुक्त अस्पताल से भी एक और गंभीर मामला सामने आया है। हमारी टीम के हाथ लगे एक अन्य वीडियो में अस्पताल के सर्जन डॉ. महेंद्र कुमार कथित तौर पर एक मरीज से ऑपरेशन के एवज में सीधे पैसे मांगते दिखाई दे रहे हैं। दूर-दराज से आने वाले गरीब मरीज, जो निजी अस्पतालों का भारी-भरकम खर्च उठाने में असमर्थ होकर सरकारी अस्पताल की चौखट पर आते हैं, वहां उन्हें इलाज के नाम पर इस तरह की अवैध मांग का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन का रवैया, ‘संज्ञान में नहीं था मामला’

इस पूरे मामले और वायरल वीडियो के संबंध में जब जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. राकेश कुमार से सवाल किया गया, तो उन्होंने पारंपरिक प्रशासनिक ढाल का सहारा लिया।

‘यह पूरा मामला अभी तक मेरे संज्ञान में नहीं था। हालांकि, यदि इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत मिलती है या वीडियो की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी’ – डॉ. राकेश कुमार, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS)

उठे गंभीर सवाल, आखिर कब तक ढीली रहेगी नकेल?

अस्पताल प्रशासन भले ही अनभिज्ञता का बहाना बनाए, लेकिन यह घटना कई कड़े सवाल छोड़ती है

प्रशासनिक अनदेखी: यदि अस्पतालों में पहले भी इस प्रकार की शिकायतें आती रही हैं, तो आंतरिक निगरानी तंत्र पूरी तरह नाकाम क्यों साबित हो रहा है?

सरकार की छवि पर धब्बा: जब मुख्यमंत्री स्तर से सख्त निर्देश जारी हैं, तब सरकारी तंत्र में बैठे ऐसे कौन से तत्व हैं जो बेखौफ होकर अपनी जेबें भरने और सरकार की साख खराब करने में लगे हैं?

कार्रवाई का इंतजार: क्या महकमा केवल कागजी जांच और नोटिस जारी करने तक सीमित रहेगा या दोषियों पर कड़ी अनुशासनात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी?

फिलहाल, इस खुलासे के बाद पूरे गाजियाबाद जिले की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि गरीबों के हक पर डाका डालने वालों पर गाज कब गिरती है।

कांवड़ यात्रा को लेकर गाजियाबाद में 170 शराब की दुकानें ढकी जाएंगी, आबकारी विभाग ने दिए निर्देश

गाजियाबाद में कावड़ यात्रा को लेकर आबकारी विभाग ने भी तैयारी जोरों के साथ शुरू कर दी है। कावड़ यात्रा को लेकर गाजियाबाद में संचालित 170 शराब की दुकानों को पूर्ण रूप से ढका जाएगा, जिससे यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं को किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं हो। इन 170 दुकानों में देसी शराब के ठेके, भांग की दुकान और कंपोजिट मॉडल शॉप शामिल है। आबकारी अधिकारी संजय सिंह ने बताया कि गाजियाबाद में इस समय 170 शराब की दुकानें संचालित है। सभी संचालकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह अपनी दुकान को पूरी तरह से कवर्ड करके रखें। कार्यों की देखरेख के लिए 6 टीम में बनाई गई हैं, जो इन दुकानों का निरीक्षण करके व्यवस्था का जायजा लेगी।

बारामूला में कथित सामूहिक दुष्कर्म और वीडियो बनाने के आरोप में दो गिरफ्तार, पुलिस ने शुरू की जांच

बारामूला में कथित सामूहिक दुष्कर्म और घटना का वीडियो बनाने के आरोप में दो गिरफ्तार: एसएसपी गुरिंदरपाल सिंह

कहा- तकनीकी साक्ष्यों और मानव खुफिया जानकारी की मदद से आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया

बारामूला पुलिस ने मंगलवार को बताया कि एक युवती के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म करने और घटना का वीडियो बनाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कहा कि यह कार्रवाई तकनीकी साक्ष्यों और मानव खुफिया जानकारी के आधार पर की गई विस्तृत जांच के बाद संभव हुई।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बारामूला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) गुरिंदरपाल सिंह ने बताया कि 25 जुलाई को पीड़िता ने पुलिस स्टेशन बारामूला में शिकायत दर्ज कराई। उसने आरोप लगाया कि वह अपने एक पुरुष मित्र के साथ जालशीरी ड्रंगबल घूमने गई थी, जहां दो लोगों ने उन्हें रोक लिया।

एसएसपी ने बताया कि आरोपियों ने दोनों के साथ बदसलूकी की, मारपीट की और युवती के साथ कथित रूप से यौन उत्पीड़न किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों ने इस घटना का वीडियो बनाया और बाद में उसे अन्य लोगों को भी दिखाया।

एसएसपी ने कहा कि जांच की शुरुआत में पुलिस को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा क्योंकि पीड़िता आरोपियों को केवल उनके पहले नाम से जानती थी। हालांकि, तकनीकी साक्ष्यों और मानव खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की पहचान की और सोमवार को उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शाकिर अहमद लोन और मोहम्मद अशरफ के रूप में हुई है। दोनों जालशीरी के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार, दोनों पेशे से ड्राइवर हैं, जबकि 27 वर्षीय मोहम्मद अशरफ विवाहित है।

एसएसपी ने बताया कि दोनों आरोपी पुलिस हिरासत में हैं और मामले की जांच कानून के अनुसार निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से की जा रही है।

दिल्ली में देर रात फायरिंग, एक की मौत, एक घायल

27-28 जुलाई की दरमियानी रात करीब 12:41 बजे पीएस पीपी पुर इलाके में फायरिंग की सूचना पर PCR कॉल मिली।

सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, SHO, ACP और DCP मौके पर पहुंचे।

पुलिस ने दोनों घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

28 वर्षीय मोहम्मद इरशाद आलम उर्फ गुड्डू को कई गोलियां लगी थीं और गले पर भी धारदार हथियार से हमला किया गया था।

अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सुरक्षित रखवा दिया गया है।

27 वर्षीय मोहम्मद फारुख के बाएं हाथ में गोली लगी। AIIMS ट्रॉमा सेंटर में इलाज के बाद प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी गई।

मौके का क्राइम टीम और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने निरीक्षण किया।

घटनास्थल से 10 खाली कारतूस और 2 जिंदा कारतूस बरामद कर जांच के लिए जब्त किए गए।

आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें गठित की गई हैं।

CCTV फुटेज, तकनीकी निगरानी और अन्य पहलुओं से जांच जारी है।

संबंधित धाराओं में FIR दर्ज की जा रही है, मामले की जांच जारी है।

बिटकॉइन मनी लॉन्ड्रिंग केस: राज कुंद्रा ने PMLA कोर्ट के समन को बॉम्बे हाई कोर्ट में दी चुनौती, आज सुनवाई

शिल्पा शेट्टी के पति और कारोबारी राज कुंद्रा ने बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, बिटकॉइन मामले में PMLA कोर्ट के समन और संज्ञान आदेश को दी चुनौती, आज होगी सुनवाई

कारोबारी राज कुंद्रा ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में विशेष PMLA अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है। जिसपर आज सुनवाई होनी है।

याचिका में राज कुंद्रा ने 5 जनवरी 2026 को विशेष PMLA कोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को रद्द करने की मांग की है, जिसके तहत अदालत ने ED की सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन शिकायत पर संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ समन जारी किया था।

कुंद्रा के वकील प्रशांत पाटिल ने बताया कि याचिका के अनुसार, ED ने 16 सितंबर 2025 को राज कुंद्रा को आरोपी नंबर 17 बनाते हुए सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन शिकायत दाखिल की थी। इसके बाद विशेष PMLA अदालत ने 5 जनवरी 2026 को मामले का संज्ञान लिया और समन जारी किया।

राज कुंद्रा का दावा है कि अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 223(1) के तहत अनिवार्य सुनवाई का अवसर दिए बिना संज्ञान लिया, जो कानून के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के विपरीत है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के कुशल कुमार अग्रवाल बनाम ED मामले के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी आरोपी के खिलाफ संज्ञान लेने से पहले उसे सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

राज कुंद्रा ने हाई कोर्ट से विशेष PMLA अदालत के 5 जनवरी 2026 के आदेश और उसके आधार पर जारी समन को रद्द करने की मांग की है। मामले पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है

पुलिसकर्मियों पर बढ़ती हिंसा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका, सुरक्षा के लिए गाइडलाइन बनाने की मांग

सुप्रीम कोर्ट में पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा को लेकर याचिका दायर

ड्यूटी के दौरान घायल हुए ACP कैलाश सिंह बिष्ट, ASI संदीप, कॉन्स्टेबल धीरज और ASI हेमेन्दर राठी के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि पुलिसकर्मियों को भी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का समान संरक्षण मिले।

पुलिस के खिलाफ हिंसा भड़काने या उकसाने वाले लोगों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए जाएं।

ड्यूटी पर तैनात पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट गाइडलाइन बनाई जाए।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिसकर्मी अक्सर हिंसा का सामना करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं।

दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन…

साइबर ठगों के ‘म्यूल अकाउंट’ गिरोह का भंडाफोड़..

10 आरोपी गिरफ्तार..

दिल्ली पुलिस की साइबर पुलिस स्टेशन की टीम ने एक बड़े म्यूल अकाउंट सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में कुछ बैंक अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कई अहम दस्तावेज, बैंक खाते, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल सबूत बरामद किए हैं।

पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह साइबर ठगों को ऐसे बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी से हासिल रकम को इधर-उधर भेजने और छिपाने के लिए किया जाता था। ऐसे खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है। इन खातों के जरिए ठगी की रकम को कई अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर जांच एजेंसियों को गुमराह करने की कोशिश की जाती थी।

जांच में पता चला कि गिरोह सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। इसमें बैंकिंग सिस्टम से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका भी सामने आई है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
[1:39 pm, 28/07/2026] Puneet Sir: सुप्रीम कोर्ट में पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा को लेकर याचिका दायर

ड्यूटी के दौरान घायल हुए ACP कैलाश सिंह बिष्ट, ASI संदीप, कॉन्स्टेबल धीरज और ASI हेमेन्दर राठी के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

याचिका में कोर्ट से मांग की गई है कि पुलिसकर्मियों को भी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का समान संरक्षण मिले।

पुलिस के खिलाफ हिंसा भड़काने या उकसाने वाले लोगों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए जाएं।

ड्यूटी पर तैनात पुरुष और महिला पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट गाइडलाइन बनाई जाए।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान पुलिसकर्मी अक्सर हिंसा का सामना करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देश जरूरी हैं।