गंदे बेडरोल की शिकायत पर रेलवे की कार्रवाई, लेकिन मामला सिर्फ एक ट्रेन तक सीमित नहीं — ऐसे लापरवाह वेंडरों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
गंदे बेडरोल की शिकायत पर रेलवे की कार्रवाई, लेकिन मामला सिर्फ एक ट्रेन तक सीमित नहीं — ऐसे लापरवाह वेंडरों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग
गाजियाबाद। यात्रियों को उपलब्ध कराए जाने वाले बेडरोल की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अमित किशोर ने सप्त क्रांति एक्सप्रेस में गंदा बेडरोल खुले पैकेट में दिए जाने, पैकेट में हैंड टॉवल नहीं होने तथा यात्रियों की सहायता के लिए लंबे समय तक कोच अटेंडेंट के उपलब्ध नहीं होने की शिकायत रेलवे से की थी।
शिकायत के बाद रेलवे की ओर से मामले की जांच की गई। रेलवे की प्रतिक्रिया में बताया गया कि संबंधित कर्मचारियों द्वारा गंदी पट्टी और ताजा पट्टी का आदान-प्रदान किया गया था तथा संबंधित अधिकारियों को अनुबंध की शर्तों के अनुसार संबंधित वेंडर पर जुर्माना लगाने के लिए सूचित किया गया है। शिकायत के बाद अटेंडेंट द्वारा साफ-सुथरा बेडरोल भी उपलब्ध कराया गया।
अमित किशोर ने कहा कि यह कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन केवल एक मामले में बेडरोल बदल देना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि यह समस्या किसी एक ट्रेन तक सीमित नहीं है। यात्रियों को आए दिन गंदे अथवा संदिग्ध गुणवत्ता वाले बेडरोल मिलने की शिकायतें सामने आती रहती हैं और उन्होंने स्वयं भी लगभग हर रेल यात्रा में इस प्रकार की शिकायतें दर्ज कराई हैं।
उन्होंने कहा, “रेलवे में बेडरोल यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य और स्वच्छता से सीधे जुड़ा विषय है। जिस वेंडर या एजेंसी की लापरवाही के कारण यात्रियों को गंदे बेडरोल उपलब्ध कराए जा रहे हैं, उसके खिलाफ केवल जुर्माना लगाना पर्याप्त नहीं है। यदि जांच में लगातार लापरवाही या जानबूझकर गंदे बेडरोल की सप्लाई करना साबित होता है तो ऐसे वेंडर/एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए।”
रेलवे मंत्रालय एवं संबंधित अधिकारियों से अमित किशोर की मांगें
- बेडरोल की सप्लाई करने वाले वेंडरों/एजेंसियों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- यात्रियों को गंदे या इस्तेमाल किए हुए बेडरोल की सप्लाई करने वाले दोषी वेंडरों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
- बार-बार शिकायत मिलने वाले वेंडरों/एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट किया जाए।
- प्रत्येक ट्रेन में बेडरोल की गुणवत्ता और पैकेजिंग की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए।
- पैकेट में निर्धारित सभी सामग्री, जिसमें बेडशीट, कंबल कवर और हैंड टॉवल आदि शामिल हैं, उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए।
- शिकायत के बाद केवल बेडरोल बदलने के बजाय यह भी जांच हो कि गंदा बेडरोल यात्रियों तक पहुंचा कैसे और इसके लिए जिम्मेदार कौन था।
- यात्रियों की शिकायतों का स्थायी समाधान किया जाए ताकि उन्हें हर यात्रा में अलग-अलग शिकायत दर्ज कराने के लिए मजबूर न होना पड़े।
अमित किशोर ने कहा कि रेलवे देश के करोड़ों यात्रियों की जीवनरेखा है और यात्रियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की लापरवाही को केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रखकर जिम्मेदार एजेंसी और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उन्होंने रेलवे मंत्रालय, रेल मंत्री एवं संबंधित अधिकारियों से इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यापक जांच तथा दोषी वेंडरों के खिलाफ कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।