खोड़ा का काला सच: खाकी की मेहरबानी से गुर्जर गेट के पास सज रही है शराब माफिया की रात भर महफिलें!
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गाजियाबाद: एनसीआर की देहरी पर बैठे खोड़ा गाजियाबाद प्रशासन की निकम्मेपन और मिलीभगत का सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुका है। यहां के गुर्जर गेट इलाके में कानून के इकबाल को ठेंगा दिखाते हुए सरेआम, खुलेआम और पूरी बेखौफ अंदाज में रात भर शराब की अवैध नदियां बह रही हैं। प्रशासन की आंखों पर बंधी पट्टी और स्थानीय पुलिस की संदिग्ध चुप्पी ने इन शातिर शराब माफियाओं के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि अब उन्हें किसी का खौफ नहीं रहा।
खुलेआम चल रहा खाकी का खेल
नियमानुसार और आबकारी विभाग के कागजों में भले ही रात को ठेके बंद होने का ढिंढोरा पीटा जाता हो, लेकिन खोड़ा के गुर्जर गेट के पास की हकीकत इन कागजी दावों की धज्जियां उड़ा रही है। रात के 10 बजते ही यहां अवैध शराब के सौदागर सक्रिय हो जाते हैं और सड़कों के किनारे, खोखों और दुकानों की आड़ में सरेआम बोतलों के दौर शुरू हो जाते हैं। सुबह तक चलने वाले इस अवैध कारोबार में युवाओं की पीढ़ी को नशे के गर्त में धकेला जा रहा है, और रखवाले बने वर्दीधारी अपनी जेबें गर्म करने में व्यस्त हैं।
प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा तांडव
हद तो ये है कि सब कुछ स्थानीय पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगती। क्या जिला प्रशासन और पुलिस के बड़े अधिकारियों को इस अवैध धंधे की भनक नहीं है? या फिर इस खुली लूट पर खामोश रहने के एवज में कोई मोटी मलाई काटी जा रही है?
खोड़ा की जनता अब त्रस्त आ चुकी है। इस बेलगाम शराब माफिया ने इलाके का माहौल और कानून-व्यवस्था पूरी तरह चौपट कर दी है। देर रात तक यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे आम नागरिकों, खासकर महिलाओं और बच्चों का घर से निकलना तक दूभर हो गया है। अब देखना यह होगा कि इस सनसनीखेज खुलासे के बाद गाजियाबाद के आला अधिकारी गहरी नींद से जागते हैं और इन सफेदपोश संरक्षण प्राप्त शराब माफियाओं पर बुलडोजर जैसी कोई ठोस कार्रवाई करते हैं, या फिर खोड़ा यूं ही अपराधियों और शराब तस्करों की शरणस्थली बना रहेगा।