5 सितम्बर 2026

बिना उपभोक्ता की सहमति स्मार्ट मीटर लगाने पर सवाल, जेई द्वारा मुकदमे की धमकी का आरोपसमाजसेवी अमित किशोर ने की कार्रवाई रोकने और जेई पर विभागीय कार्रवाई की मांग की

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विशेष संवाददाता | प्रमोद कौशिक


गाजियाबाद। बहुमंजिला आवासीय सोसायटियों में उपभोक्ताओं की सहमति के बिना प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाए जाने की कार्रवाई को लेकर समाजसेवी अमित किशोर ने विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब केंद्रीय ऊर्जा मंत्री द्वारा लोकसभा में स्पष्ट किया जा चुका है कि उपभोक्ता की सहमति के बिना बिजली कनेक्शन को प्रीपेड मोड में परिवर्तित नहीं किया जा सकता, तो स्थानीय स्तर पर विद्युत विभाग द्वारा बिना स्पष्ट सहमति के स्मार्ट मीटर लगाने की कार्रवाई कैसे की जा सकती है?
अमित किशोर ने बताया कि विद्युत नगरीय वितरण खण्ड-2, वसुंधरा के अधिशासी अभियंता द्वारा दिनांक 10 अगस्त 2026 को जारी पत्र में बहुमंजिला आवासीय सोसायटियों में पूर्व से स्थापित मीटरों के स्थान पर ऑनलाइन प्रीपेड मीटर लगाने के लिए संबंधित सोसायटियों के अध्यक्ष, रेजिडेंट्स एवं मैनेजरों से सहयोग करने को कहा गया है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित एजेंसी द्वारा 18 अगस्त 2026 से मीटर लगाने का कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
अमित किशोर का कहना है कि यदि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था है और इसके लिए उपभोक्ता की सहमति आवश्यक है, तो विभाग को पहले प्रत्येक उपभोक्ता को पूरी जानकारी उपलब्ध कराकर उसकी स्वैच्छिक एवं स्पष्ट सहमति लेनी चाहिए। किसी भी प्रकार के विभागीय दबाव के माध्यम से उपभोक्ताओं को मीटर बदलने के लिए बाध्य करना उचित नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सोसायटी के सुपरवाइजर को संबंधित जेई द्वारा कथित रूप से यह कहा गया कि यदि स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध किया गया तो सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा दर्ज करा दिया जाएगा। अमित किशोर ने इसे गंभीर और आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि अपने बिजली कनेक्शन से संबंधित नई व्यवस्था के बारे में जानकारी मांगना अथवा अपनी सहमति नहीं देना सरकारी कार्य में बाधा कैसे हो सकता है, यह विद्युत विभाग को स्पष्ट करना चाहिए।


अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर की कार्रवाई रोकने की मांग
समाजसेवी अमित किशोर ने इस पूरे मामले को लेकर अधिशासी अभियंता, विद्युत नगरीय वितरण खण्ड-2, वसुंधरा को लिखित पत्र देकर बिना उपभोक्ताओं की सहमति के स्मार्ट मीटर लगाने की कार्रवाई पर अविलंब रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने पत्र में यह भी मांग की है कि सोसायटी के सुपरवाइजर को कथित रूप से मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देने वाले जेई के आचरण की विभागीय जांच कराई जाए तथा आरोप सही पाए जाने पर उसके विरुद्ध आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाए। उन्होंने यह भी मांग की है कि जब तक प्रत्येक संबंधित उपभोक्ता को स्मार्ट मीटर की पूरी प्रक्रिया, बिलिंग व्यवस्था, रिचार्ज प्रक्रिया तथा पुराने मीटर की अवशेष राशि के समायोजन सहित सभी जानकारी उपलब्ध कराकर उसकी स्वैच्छिक सहमति प्राप्त न कर ली जाए, तब तक किसी भी उपभोक्ता का मीटर परिवर्तित न किया जाए।


X पर मुख्यमंत्री, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग
अमित किशोर ने इस मामले को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के माध्यम से भी प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री तथा उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में उपभोक्ता की सहमति को महत्वपूर्ण बताया गया है और दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर यदि अधिकारियों द्वारा इसके विपरीत कार्रवाई की जाती है अथवा विरोध करने पर मुकदमे की धमकी दी जाती है, तो यह गंभीर विरोधाभास है।


“सहमति से स्मार्ट मीटर लगाएं, दबाव से नहीं”
अमित किशोर ने कहा कि “हम स्मार्ट मीटर की तकनीक या व्यवस्था के विरोध में नहीं हैं, लेकिन उपभोक्ताओं के अधिकारों और उनकी सहमति की अनदेखी स्वीकार नहीं की जा सकती। यदि स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के हित में है तो विभाग को पारदर्शी तरीके से उसकी पूरी जानकारी देनी चाहिए और उपभोक्ता की स्वैच्छिक सहमति से ही मीटर लगाया जाना चाहिए। किसी अधिकारी द्वारा विरोध करने पर मुकदमे की धमकी देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।” उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने, बिना सहमति स्मार्ट मीटर लगाने की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाए जाने तथा उपभोक्ताओं को धमकाने के आरोपों की जांच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई सुनिश्चित किए जाने की मांग की है। इस संबंध में विद्युत विभाग का पक्ष जानने के लिए जब अधिशासी अभियंता अजय कुमार यादव जी को फोन किया गया तो समाचार लिखे जाने तक उनसे संपर्क नहीं हो पाया।

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